कुछ वर्षों पूर्व, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे शब्द केवल भारत में प्रयोगशाला, सम्मेलनों और तकनीकी आयोजनों तक ही सीमित थे. वर्तमान में, ये शब्द अब हमारी सामान्य बातचीत का हिस्सा बन चुके हैं. किसान, छात्र, स्टार्टअप संस्थापक और नीतिगत निर्माता सभी लोग अलग- अलग तरीकों से इन तकनीकों से जुड़े हुए हैं तथा इसका प्रयोग कर रहे हैं. यह परिवर्तन अचानक नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे भारत की दीर्घकालिक दृष्टि है, जो देश को ना केवल तकनीक का उपभोक्ता बनाना चाहता है, बल्कि उसका निर्माता भी बनना चाहता है .
भारत सरकार का राष्ट्रीय मिशन इसी सोच को दर्शाता है. चाहे वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हो या क्वांटम टेक्नोलॉजी, इन अभियानों का मकसद बिलकुल स्पष्ट है – भविष्य की तकनीकों को आज की ज़रूरतों से जोड़ना और हमारे देश के युवाओं को इसके लिए तैयार करना.
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भारत सरकार का राष्ट्रीय मिशन इसी सोच को दर्शाता है. चाहे वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हो या क्वांटम टेक्नोलॉजी, इन अभियानों का मकसद बिलकुल स्पष्ट है – भविष्य की तकनीकों को आज की ज़रूरतों से जोड़ना और हमारे देश के युवाओं को इसके लिए तैयार करना.
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